सोमवार, 16 अगस्त 2010


बात होंठों पे चली आए ज़रूरी है क्या
दिल में तूफ़ान ठहर जाए ज़रूरी है क्या

कितने अंदाज़ से जज़्बात बयां होते हैं
वो इशारों में समझ जाए ज़रूरी है क्या

क्या वो करते हैं? कहां जाते हैं? कहां से आते 
तुम से हर बात कही जाए ज़रूरी है क्या

नाव टूटी है तो क्या खेना नहीं छोडूंगा
नाव लहरों में ही खो जाए ज़रूरी है क्या

मुश्किलें देख के तू  इतना परीशां क्यूं  है
ज़िंदगी यूं ही गुज़र जाए ज़रूरी है क्या

कह दिया उस को जो कहना था समझ जाओ "यकीन"
बार-बार आप को समझाए ज़रूरी है क्या


3 टिप्‍पणियां:

  1. कितने अंदाज़ से जज़्बात बयां होते हैं
    वो इशारों में समझ जाए ज़रूरी है क्या
    bahut hi umada shayari hai

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  2. अच्छी गज़ल.


    मुश्किलें देख के तू इतना परीशां क्यूं है
    ज़िंदगी यूं ही गुज़र जाए ज़रूरी है क्या

    बहुत अच्छा लगा.

    (कॉमेंट्स से वर्ड वेरिफिकेशन हटा दें तो कमेन्ट देने में आसानी होगी)

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  3. नाव टूटी है तो क्या खेना नहीं छोडूंगा
    नाव लहरों में ही खो जाए ज़रूरी है क्या
    पुरषोत्तम साब , आदाब !
    मेरी पसंद का शेर आप कि नज़र है ,
    सादर

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